देश के 65% से अधिक OBC समाज के लोग क्या कर रहे है |

देश के 65% से अधिक OBC समाज के लोग

1.बजरंग दल में है,
2.विश्व हिंदू परिषद में है,
3.शिव सेना में है,
4.गौरक्षा दल में है,
5.RSS में है ;
6.हिन्दू युवा वाहिनी में है,
7.श्री राम सेना में है,
8.गायत्री परिवार में है,
9.आर्य समाज में है,
10.स्वाध्याय परिवार में है;
11.करणी सेना में है ;
12.और जितने भी देश मे धार्मिक संगठन है सभी में है।

सिर्फ यहाँ नहीं है ओबीसी के लोग

1.न्यायालयों में जज नहीं है
2.सरकारी वकील नहीं है
3.यूनिवर्सिटीज में प्रोफेसर लेक्चरर नहीं है
4.शासन में सचिव नहीं है
5.आईएएस आईपीएस ऑफिसर नहीं है।
6.डिप्टी कलेक्टर डीएसपी नहीं है
7.बड़ी बड़ी कंपनियों में CMD डायरेक्टर नहीं है
8.जनसंख्या के अनुपात में मंत्री, विधायक ,सांसद नहीं है।
9.मीडिया में मालिक, संपादक, ब्यूरोचीफ नहीं है।
10.भारत मे एक भी बड़ा बिजनेस मैन ओबीसी का नहीं है।

फिर भी ओबीसी समाज की आंखें नहीं खुल रही है,

मनुस्मृति की वापसी : रोक सकें तो रोक लें

  1. जज कॉलेजियम से बनेंगे।
  2. आईएएस लेट्रल एंट्री से बनेंगे।
  3. बाकी नौकरियां ठेके या संविदा पर होंगी।
  4. बेहतर शिक्षा इतनी महंगी कि कोई ईमानदार व्यक्ति वहां अपने बच्चे नहीं पढ़ा पायेगा और सरकारी शिक्षा को साजिश के तहत बर्बाद किया जा रहा है।
  5. सरकारी क्षेत्र को धीरे धीरे खत्म किया जा रहा है, जहाँ आरक्षण का लाभ मिलता है, आरक्षण तो रहेगा पर सरकारी क्षेत्र ही नहीं रहेगा तो आरक्षण अपने आप ही ख़त्म हो जायेगा और उसे ख़त्म करने का दोषी भी कोई नही होगा।

6) SC, ST, OBC को प्रतिनिधित्वविहीन किया जाएगा और उन्हें जातिगत पेशों में लौटने के लिए मज़बूर किया जाएगा। और यह नौबत इसलिए आई क्योंकि SC ST OBC ने महज़ पेट भरने के लिए नौकरियां की।

7) अब भी अंतिम अवसर है कि इन सबकी ज़िम्मेदार रही मनुवादियों की पार्टियों को सबक सिखाने के लिए एकजुट होकर सामाजिक-आर्थिक और राजनीतिक क्रांति के लिए कमर कस लो और आंदोलन का रास्ता अपनाओ….. तभी सदियों से चली आ रही वर्ण व्यवस्था से निजात मिलेगी।
अतः
जागना है तो जाग लो छोड़ पुरानी रीत।
फिर पाछे पछताओगे जब समय जाएगा बीत।।
धन्यवाद!

ऐसे ही मोटिवेशनल लेख ओबीसी समाज को जागृत करने में सहायक होंगे! इसलिए इसे शेयर करे

जयभीम जय संविधान 🙏

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *