Dr. BR Ambedkar कौन थे

जीवनी

जन्म :14 अप्रैल 1891, डॉ अंबेडकर नगर
: 6 दिसम्बर 1956,
पूरा नाम : भीम राव अंबेडकर
पढ़ाई : लंडन स्कूल ऑफ इक्नोमिक्स और पोलिटिकल साइन्स (1916-1922) आदि
पिता : रामजी सकपल ,
माता : भीमबाई सकपल

डॉ B R Ambedkar का जनम पश्चिम भारत के एक दलित महार के परिवार मे हुआ था ।
एक महार जाती (नीची जाती) का होने के कारण वह अपने स्कूली के बच्चो के दावरा हमेसा अपमानित किए जाते थे ।
उनके पिता जी बड़ौदा मे सेना के अधिकारी थे । बड़ौदा जो की अब वडोदरा के नाम से जाना जाता है ।

उस वक्त वह के शासक गायकवाड थे जिनके दावरा छत्रवित्ति प्राप्त करने के बाद ,
उन्होने सयुक्त राज्यों मे अपने अध्ययन किए जैसे की अमेरिका , ब्रिटेन , जर्मनी के विश्व विद्यालयो मे ।

गायकवाड़ के अनुरोध पर वह बड़ौदा लौटे और बड़ौदा लोक सेवा में प्रवेश किया, लेकीन महार जाती का होने के कारण वह अपने उच्चि जाती के सहयोगियों द्वारा फिर से दुर्व्यवहार किए जाने पर, उन्होने कानूनी अभयश (Law की पढ़ाई ) और शिक्षण की की ओर अपना रुख कीया l

उसके बाद उन्होने जल्द ही दलितो के बीच अपने नेतृत्व की साथपना की और कई पत्रिकाओ की स्थापना की और सरकार के विधान परिसदों मे उनके लिए विशेष प्रतिनिधित्व प्राप्त करने में सफल रहे।

उन्होने दलितो के हक के लिया बहुत सारे आंदोलन भी चलाया और उनहे हक के लिया जैसे की

सामाजिक एवं धार्मिक योगदान

मानवाधिकार जैसे दलितों एवं दलित आदिवासियों के मंदिर प्रवेश, पानी पीने, छुआछूत, जातिपाति, ऊंच-नीच जैसी सामाजिक कुरीतियों को मिटाने के लिए कार्य किए.

-उन्होंने मनुस्मृति दहन (1927), महाड सत्याग्रह (1928), नाशिक सत्याग्रह (1930), येवला की गर्जना (1935) जैसे आंदोलन चलाएं.

बेजुबान, शोषित और अशिक्षित लोगों को जागरुक करने के लिए साल 1927 से 1956 के दौरान मूक नायक, बहिष्कृत भारत, समता, जनता और प्रबुद्ध भारत नामक पांच साप्ताहिक और पाक्षिक पत्र-पत्रिकाओं का संपादन किया.

– उन्होंने छात्रावास, नाइट स्कूल, ग्रंथालयों और शैक्षणिक गतिविधियों के माध्यम से कमजोर वर्गों के छात्रों को अध्ययन करने और साथ ही आय अर्जित करने के लिए उनको सक्षम बनाया. सन् 1945 में उन्होंने अपनी पीपुल्स एजुकेशन सोसायटी के जरिए मुम्बई में सिद्वार्थ महाविद्यालय तथा औरंगाबाद में मिलिन्द महाविद्यालय की स्थापना की.

हिन्दू विधेयक संहिता के जरिए महिलाओं को तलाक, संपत्ति में उत्तराधिकार आदि का प्रावधान कर उसके कार्यान्वयन के लिए संघर्ष किया.

भारत का सविधान

और 1947 में अम्बेडकर भारत सरकार के कानून मंत्री बने।
उन्होंने भारतीय संविधान के निर्माण में एक प्रमुख हिस्सा लिया, अछूतों के खिलाफ भेदभाव को रेखांकित किया,
और कुशलता से इसे विधानसभा के माध्यम से चलाने में मदद की।
सरकार में उनके प्रभाव की कमी से निराश होकर उन्होंने 1951 में इस्तीफा दे दिया। अक्टूबर 1956 में, हिंदू सिद्धांत में छुआछूत के अपराध के कारण निराशा में, उन्होंने हिंदू धर्म का त्याग कर दिया और नागपुर में एक समारोह में लगभग 200,000 साथी दलितों के साथ मिलकर बौद्ध बन गए।
अंबेडकर की पुस्तक द बुद्ध एंड हिज़ धम्मा 1957 में मरणोपरांत प्रदर्शित हुई, और इसे द बुद्धा एंड हिज़ धम्मा: अ क्रिटिकल एडिशन 2011 में पुनः संपादित किया गय

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